what is deja hu

“देजा वू एक ऐसा विज्ञान है जिसका अर्थ है पहले भी जाना जा चूका”| Deja VU Kya Hai

क्या है देजा वु

आप कभी कबार जब किसी घटना से रूबरू होते है, दूसरे ही पल में हैरानी से खुद को ही समझाते है इससे मिलती जुलती घटना पहले भी मेरे जीवन में घटित हो चुकी है.

और कुछ पलमें आप शून्य विश्व में चले जाते है, कितना भी दिमाग पे जोर देने पर आप उस घटना को स्पष्ट रूप में याद नही कर पाते, पर आप ये अस्पष्ट रूप में महसूस कर पाते है की ये घटना आपके जीवन में पहले भी घट चुकी है!

इसी को कहते है देजा वू. इसका भाषांतरण है “पहले भी जी चुका या पहले भी घट चुका”

 

समझते है इससे जुड़े संकेत:Deja VU Kya Hai

संकेत 1.) कोई किताब हो सकती है, कुछ पन्ने पढ़ने के बाद आपको लगने लगता है ये कहानी आप पहले से जानते हो.

और यकीन माने आप किताब में आगे क्या होने वाला है ये भी सोच लेते है,

संकेत 2.) आप किसी यैसी जगह जाते है, जहा आप इससे पहले कभी गये नही है… पर उन वादियों को जैसे जैसे आप महसूस करने लगते है, आपको लगने लगता है यार यहां मैं पहले भी आया हूं.( ये बिलकुल करण–अर्जुन फिल्म के उस सीन जैसा है, जिसमे हमारा करण अर्जुन को चिल्ला चिल्ला के कहता है। ” भाग अर्जुन भाग ”  और वो सर पकड़े सोचता रहता है साला ये पल मैं पहले भी जी चुका हूं)

ये एक एहसास है, रोमांटिक भाषा में कहा जाएं तो ये एक फीलिंग है, सही अड़चन यही तो है की साली फीलिंग सिर्फ महसूस की जाती है बताई नही जाती.

इसी लिऐ हम जीवन में सभी डेजा वू को जी चुके होते है!पर किसी को बता नही पाते.

आखीर देजा वू है क्या:

  •  देजा वु एक फ्रेंच शब्द है जीसका अर्थ है पेहले भी जी चुका  
  • ये एक सायकॉलॉजी कंडीशन है.
  •  बहोत कम समय में घटित होता है पर इसका प्रभाव गहरा होता है
  • लगभग 80% लोगो को देजा हू होता है

इसके पीछे बहोत सी थियरीज है
हमारे दिमाग की रचना समझे तो, वो एक computer file store system की तरह है, उसका फॉरमॅट है date.
नयी घटनाये एक जगह होती है और पुराणी घटनाये दुसरी जगह स्टोर होती है.
शॉर्ट टर्म मेमरी ओर लाँग टर्म मेमरी रहती तो दिमाग में है पर उसके डिपार्टमेंट अलग अलग है.
पर हम इंसान हैं मशीन थोडी ना है,गडबड तो हो ही शकती है.

देजा हु होता है तब हमने अभी जो घटना मेहसुस की है वो गडबडी से दुसरे डिपार्टमेंट में स्टोर होती है,लाँग टर्म वाले हिस्से में.
जो की पुराणी यादो का बक्सा है,हम उस घटना को पुराणी समझने लगते है पर होती वो नयी है.दिमाग उलझन में पड जाता है और साव्रत्रीक तर्क निकालता है की ये घटना मेरे साथ अतीत में घट चुकी है.

दुसरी थियरी मॅट्रिक्स थियरी है

ये बहोत उलझन भरी है, कुछ पंक्तीवो में समझे तो
इस थेयरी के हिसाब से हम असल दुनिया में जी ही नहीं रहे
ये एक काल्पनिक दुनिया है. हमारे आस पास बनी चीजे एक प्रोग्राम है,हमारी फिलिंग भी एक प्रोग्राम है. हमारे भितर फिलिंगके ऐसे छोटे छोटे प्रोग्राम इंस्टॉल है जिसे हम फिलिंग समजते है.
कोई प्रोग्राम को हटाया गया हो( प्रोग्राम माने घटना) पर उसका डाटा हमारे बैक एंड में मौजूद है और हम उसे महसूस कर लेते है.पर उसमें कोई अधिक सप्ष्टता नही होती.

आप समझ ही गए होंगे की Deja Vu Kya Hai

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